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आक्सी और समयोग ने बनायी नयी संस्था


Aksi, the one and half years old registered organisation of indologie students ans Samyoga, an informal organisation of indian students in Munich finally merged to form a new organisation. Legally speaking, Aksi is renamed to a more generic name.



कई सप्ताहों के विचार विमर्श के बाद अन्त में इण्डोलोजी के छात्रों की संस्था आक्सी और भारतीय छात्रों की संस्था 'समयोग' ने मिलकर एक नयी संस्था का गठन किया जिसका नाम है 'Gesellschaft für deutsche-indische Zusammenarbeit e.V.', यानि 'जर्मन-भारतीय सहयोग के लिये सोसायटी'। कानूनी भाषा में आक्सी, जो पहले से एक पंजीकृत संस्था है, ने अन्य भारतीय लोगों और संस्थाओं को साथ मिलाने और आने वाले इवेन्ट्स के आयोजनों के लिये बेहतर रूप से प्रायोजक ढूंढने के लिये अपना नाम बदल कर एक अधिक सामान्य और जर्मनों द्वारा आसानी से समझा जा सकने वाला नाम अपना लिया है। इस बदलाव के मुख्य अंश हैं संस्था के नाम में बदलाव, अध्यक्ष बोर्ड के सदस्यों की गिनती तीन से बढ़ाकर सात करना, और अध्यक्ष बोर्ड के सदस्यों का फिर से वोट द्वारा चुनाव। यह अन्तिम बैठक और चुनाव 23 जनवरी को भारतीय कोंसलावास के कॉन्फ़्रेंस रूम में आयोजित किये गये जिसमें हिस्सा लेने के लिये आक्सी के वर्तमान लगभग चालीस सदस्यों के अलावा बहुत सारे अन्य लोगों को ईमेल आदि द्वारा न्यौता दिया गया था। पर आक्सी के वर्तमान सदस्यों में से केवल कुछ ही चुनाव में हिस्सा लेने के लिये आये। बैठक में सबसे पहले सिद्धार्थ मुदग्ल, जो दोनों संस्थाओं के बीच समन्वयक का काम करते रहे हैं और इवेन्ट मैनेजमैंट में सबसे सक्रिय रहे हैं, ने नयी संस्था के उद्देश्यों, संरचना और उसके द्वारा आयोजित करवाये जाने वाले कुछ संभावित इवेन्टस पर नज़र डाली। फिर उन्होंने वहां उपस्थित लोगों को नयी संस्था का सदस्य बनकर ब्रेक के बाद होने वाले अध्यक्ष बोर्ड के चुनाव में हिस्सा लेने के लिये प्रोत्साहित किया। सदस्य बनने के लिये वार्षिक सदस्यता शुल्क व्यवसायी लोगों के लिये बीस यूरो और छात्रों के लिये दस यूरो निर्धारित किया गया। उसके बाद ब्रेक हुआ जिसमें लोग आपस में विचार विमर्श कर सकते थे। ब्रेक के बाद अध्यक्ष बोर्ड के लिये चुनाव हुये। क्योंकि चुनाव में केवल संस्था के सदस्य ही भाग ले सकते थे, इसलिये वहां उपस्थित कुछ नये लोग भी फ़ार्म भर के और सदस्यता शुल्क अदा कर के सदस्य बन गये और फिर चुनाव में हिस्सा लिया। अध्यक्ष मण्डल के सदस्य इस प्रकार चुने गये हैं- डा॰ अरुण मंकन, डा॰ गोर्डन किचोन, पदमाबती मोण्डल, रिचर्ड होल्ज़बर्गर, शैलेष मोरे, सिद्धरा्थ मुदगल, डा॰ एस रायचौधरी। इसके अलावा एक अनौपचारिक सलाहकार मण्डल भी वोट द्वारा चुना गया है जिसके सदस्य हैं भारतीय महाकोंसल श्री अनूप कुमार मुदगल, म्युनिक विश्वविद्यालय के इण्डोलोजी विभाग के अध्यक्ष प्रो॰ हार्टमान, बायरन सरकार के एकता आयुक्त एम नॉयमायर, श्री निलादरी मुखर्जी और पत्रकार रुथ बुर्चार्ड। कोंसलावास भी इस संस्था को बैठकों के लिये अपना कॉन्फ़्रेंस रूम उपलब्ध करवा कर नैतिक समर्थन दे रहा है।

2010-02-06 08:50:52  print
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