मां मैं तेरा साया हूं...
मां मैं तेरा साया हूं
तेरी नौ महीने की तपस्या के बाद मैं इस दुनिया में आया हूं
तूने मुझे चलना सिखाया है
तूने ही मुझे बात करने का सलीका दिखलाया है
हर रिश्ता मैंने तुझसे ही निभाया है
बिना मेरे बोले तूने समझा मुझे
कोई दुख कैसे मैं दे दूं तुझे
मेरी इच्छा में तूने अपनी हर खुशी मनाई है
समझा मुझे अपना अंश हमेशा, नहीं कहा कभी कि यह लड़की तो पराई है
अपने से पहले मेरा पेट पाला है
अपनी हर खुशी को मुझ पर न्यौछावर कर डाला है
सिखाया भी तूने पढाया भी तूने
जीवन की कठोर स्थिति में लड़ना सिखाया भी तूने
भगवान को ज़रूर मैं मानता हूं
पर तुझसे नहीं वो पराया, यह भी जानता हूं
मेरी हर गल्ती पर पर्दा तूने डाला है
तेरे प्यार से ही मेरा जीवन बना निराला है
चोट मुझे लगी है दर्द तुझे हुआ है
कैसे न मैं कह दूं कि तेरा मेरा रिश्ता एक प्यारी सी दुआ है
कुरीतियों से कैसे बचना तूने बतलाया है
दुनिया मैं जीना भी तूने सिखलाया है
दिल जब भी मैंने तेरा दुखाया है
दुआ में भगवान से तेरे लिए सुख ही मंगवाया है
मुझे माफ़ करना मां, जो कभी गल्ती की हो
मन से हूं साफ़, दिल से दुखी हूं
तुझसे दूर मैं कैसे रहूंगा
सबसे बड़ा है दर्द, कि तुझ बिन मैं कैसे जीऊंगा
माना यह रीत है कि इक दिन मुझे जाना है
मगर मां, अपना रिश्ता भी तो जन्मों पुराना है
माना कि हर रिश्ता अब मुझे निभाना है
पर तुझ बिन जीना भी तो तूने मुझे सिखाना है
तुझसे ज़्यादा प्यार ना कभी दे पाएगा कोई
ज़िन्दगी में तेरी कमी ना पूरी कर पाएगा कोई
मेरे हर दर्द में तू मेरा साथी है
तू ही मेरी हर दुआ और मेरा अहसास है
हर दुख में तू मेरे पास है
तुझसे ज़्यादा न मुझसे किसी पर विश्वास है
तू ही है मेरे अन्दर, तू ही है मेरे बाहर की दुनिया
तेरे बिन ना कोई ना कभी कोई होगा
मेरा प्यार तेरे लिए कभी ना हुआ कम, न होगा
रिश्ता अपना प्यारा, भगवान के घर से बनकर आया है
तभी तो सब कहते हैं मुझसे 'बेटी! तू अपनी मां का ही साया है...!!!'
-शिप्रा गोयल, भारत
2010-08-30 16:28:25 print
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